News Plus

मज़दूरी बढ़ाने की मांग कर रहे फैक्टरी के मज़दूरों पर पुलिसिया कहर, सात मज़दूर गिरफ्तार


रायबरेली :  मज़दूरी बढ़ाने की मांग को लेकर सीमेंट फैक्ट्री के गेट पर प्रदर्शन कर रहे मज़दूरों को पुलिस ने गिरफ्तार का सलाखों के पीछे डाल दिया है।  

मिल एरिया थाना क्षेत्र के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित  बिरला सीमेंट फैक्ट्री पर आज कुछ मजदूर मजदूरी बढ़ाने को लेकर फैक्ट्री गेट पर धरना प्रदर्शन करने लगे, मिलएरिया थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और आधा दर्जन के करीब मजदूरों को ले आकर थाने के लाक अप में डाल दिया। इससे नाराज मजदूरों ने थाने का घेराव कर नारेबाजी शुरू कर दी। मामला बढ़ता देख मौके पर पुलिस ने वापस फिर मजदूरों को छोड़ा भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार जिले के मिलएरिया थाना क्षेत्र के इंडस्ट्रियल एरिया में बिरला सीमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले सैकड़ो मजदूरों ने अपनी मजदूरी बढ़ाये जाने को लेकर अधिकारियों की चौखट पर सर पटक रहे थे लेकिन अधिकारी कोई सुध नहीं ले रहे थे।  आज सभी मजदूर संगठित होकर फैक्ट्री के बाहर धरने पर बैठ गए और वेतन वृद्धि की मांग करने लगी।

इतनी बड़ी संख्या में मज़दूरों के प्रदर्शन को देखते हुए फैक्ट्री प्रशासन के हाथ पाँव फूल गए।  फैक्ट्री अधिकारीयों ने पुलिस बुला ली।  पुलिस ने मजदूरों की बात न सुनकर उल्टे उन्हें ही थाने लाकर बंद कर दिया।  साथी की गिरफ्तारी से नाराज़ अन्य मज़दूरों ने  थाने के बाहर घेराव कर विरोध शुरू कर दिया। मामला बढ़ता देख भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
मज़दूरों ने बताया कि वह लोग ढाई महीने से मजदूरी बढ़ाये जाने की माग कर रहे थे पर जब किसी ने उनकी बातों को नही सुना तो हम लोग धरना देने लगे और पुलिस आई हम लोगो को ही थाने ले आई। 
फैक्ट्री में दो प्रोडक्शन यूनिट है एक यूनिट पर मज़दूरों को 460 रुपये प्रतिदिन मज़दूरी दी जाती है जबकि दूसरी यूनिट पर महज़ 308 रुपये ही मिलता है।  इसके अलावा मज़दूरों से डबल शिफ्ट में काम कराया जाता है जिसका पैसा भी नहीं दिया जाता है।  
इस पूरे मामले में जब फैक्ट्री के अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया तो कोई भी अधिकारी मीडिया के सामने नहीं आया। 

केवी शिवगढ़ में 1000 पौधे रोपकर दिया गया पर्यावरण संरक्षण का संदेश


जिलाधिकारी के न पहुंचने पर छात्र-छात्राओं में दिखी निराशा

अंगद राही

रायबरेली। क्षेत्र के केंद्रीय विद्यालय शिवगढ़ में बड़े हर्षोल्लास पूर्वक वन महोत्सव कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम  का शुभारम्भ मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित उपजिलाधिकारी विनय कुमार सिंह, केंद्रीय विद्यालय संगठन लखनऊ संभाग के उपायुक्त टीपी गौड, श्री बरखण्डी विद्यापीठ इंटर कॉलेज शिवगढ़ के प्रधानाचार्य डा. त्रिदिवेन्द्रनाथ त्रिपाठी, प्राचार्य आरके भारती, खण्ड विकास अधिकारी अजय कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके किया। जिसके पश्चात छात्र-छात्राओं ने एकांकी गीत " मैं सूखा नहीं फिर भी मुझे काटा गया,ना काटो मुझे दुखता है की मन को झकझोर देने वाली भावुक प्रस्तुति देकर पेड़ पौधों के संरक्षण के प्रति सभी को सोचने के लिए मजबूर कर दिया।इसी क्रम में छात्र छात्राओं ने कई प्रेरणादायक अनुपम प्रस्तुतियां दी।तत्पश्चात सभी अतिथियों एवं छात्र-छात्राओं ने मिलकर विद्यालय प्रांगण में 1000 पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति संदेश दिया। दरअसल कार्यक्रम मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी नेहा शर्मा को पहुंचना था किंतु किन्ही कारणवश वो कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकी जिसको लेकर छात्र छात्राओं में निराशा दिखी हालांकि बाद में उपजिलाधिकारी विनय कुमार सिंह व केंद्रीय विद्यालय संगठन लखनऊ संभाग के उपायुक्त टीपी गौड़ की प्रेरणादायक बातें सुनकर सभी उत्साहित दिखे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित नवागंतुक महराजगंज उपजिलाधिकारी विनय कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण असंतुलन एक ऐसा संकट है जिससे निपटने के लिए आने वाली पीढ़ियों को अपने आचरण में बदलाव करना है। वृक्षारोपण के कार्यक्रमों से सीख लेकर उन्हें अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है। जो पौधे हमारे आसपास हैं अगर वे बेमतलब काटे जाते हैं तो हमारी नजर रहनी चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत की गई एकांकी मैं सूखा नही फिर भी मुझे काटा गया, ना काटो मुझे दुखता है। एक बड़ा संदेश दे गई निश्चित तौर हमें पेड़ पौधों के प्रति चिंतित होना चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि बच्चे पौधे और शिक्षक माली के समान हैं जो अपने प्यारी स्नेह एवं आशीष से उन्हें अभिसिंचित कर ज्ञान रूपी प्रकाश से उनके जीवन को आलोकित करते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित उपायुक्त टीपी गौड़, प्राचार्य आरके भारती सहित लोगों ने छात्र-छात्राओं  एवं अभिभावकों को संबोधित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय स्टाफ से कार्यक्रम का सफल संचालन कर रही मधु शर्मा, एनके सिंह, एनके शुक्ला, एनपी पांडेय, डॉ प्रीति वर्मा, गजराज सिंह, वीके तिवारी, महेश कुमार शुक्ला, माधव सिंह, नेहा,गोविंद,नवदीप रंगा व वन विभाग से वन क्षेत्राधिकारी प्रभात कुमार श्रीवास्तव, शिवगढ़ फॉरेस्टर जीत बहादुर सिंह, बछरावां फॉरेस्टर रामलखन शुक्ला, बीट प्रभारी श्याम बाबू सहित लोगों का कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस मौके पर एस आई अर्जुन राजपूत, रायपुर नेरुवा प्रधान प्रतिनिधि रतीपाल रावत, सुनील कुमार शुक्ला, आलोक बाजपेई,विपिन अवस्थी, हरि गोविंद मौर्य सहित अभिभावक मौजूद रहे।

हम नही सुधरेंगें कि तर्ज पर अमादा है बछरावां के अवैध अतिक्रमणकारी

रायबरेली (बछरावां) : स्थानीय प्रशासन चाहे जो भी प्रयास कर ले परंतु हम नहीं सुधरेंगे की तर्ज पर बछरावां के अतिक्रमण कारी अपनी मनमानी पर अमादा हो रहे हैं । ज्ञात हो कि अवैध अतिक्रमण से राहगीरों को मुक्ति दिलाने के लिए विगत कई दिनों से थाना प्रभारी रवेंद्र सिंह द्वारा पूरे कस्बे के व्यापारियों को  सड़कों पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने की चेतावनी दी गई ।परन्तु इन  व्यापारियों पर कोई असर नहीं हुआ। हालात यह है कि पुराने टाउन एरिया कार्यालय से लेकर गल्ला मंडी चौराहे तक सड़क के दोनों ओर अतिक्रमणकारियों द्वारा बकायदा दुकानें रखकर कब्जा कर लिया गया है ।इन दुकानों में लकड़ी की गुमटी से लेकर लोहे की बनी दुकानें शामिल हैं ।नगर पंचायत द्वारा  इस सड़क का निर्माण इस प्रकार कराया गया था। कि अगल बगल से दो ट्रक आसानी से निकल सकें ।परंतु अतिक्रमण के कारण छोटे चौपहिया वाहन भी निकल नहीं पा रहे हैं। लगभग यही स्थित शिवगढ़ मार्ग से सब्जी मंडी जाने वाले रास्ते की है , इस पर व्यापारियों द्वारा दुकानों के आगे बोरे लगा कर तरह मार्ग को सकरा कर  दिया गया है। कि साइकिल से गुजरना भी संभव नहीं हो पा रहा है। शिवगढ़ मार्ग , लालगंज , लखनऊ तथा रायबरेली मार्ग तो कहना ही क्या , संभावित खतरों को टालने के लिए ओवरब्रिज के नीचे दुकानों का लगाना अवैध करा दिया गया है । परन्तु बछरावॉ का आलम यह है कि शिवगढ़ लालगंज मार्ग पर ओवरब्रिज के नीचे पूरी तरह बाजार लगता है कई लोगों के द्वारा तो इस पुल के नीचे की भूमि का प्रयोग गैरेज के रूप में किया जा रहा है ।पुल के नीचे कई होटल संचालित हो रहे हैं किसी दिन कोई हादसा होगा तो वह दिन बचा के इतिहास का काला अध्याय माना जाएगा ।रायबरेली , शिवगढ़ मार्ग तथा महाराजगंज मार्ग की भी कमोवेश यही स्थिति है नेशनल हाईवे पर मुख्य चौराहे के पास सड़क की ही जमीन पर कई होटल भी संचालित हो रहे हैं । एक विशेष समुदाय द्वारा मार्ग पर इतने ठेले खड़े कर दिए जाते हैं कि पैदल चलना भी दूभर हो जाता है , परिवहन निगम भी सोने में सुहागा साबित होता है केवल फतेहपुर जाने वाली बसों को छोड़कर कोई भी बस स्टेशन के अंदर न  जाकर सड़क पर ही खड़ी हो जाती है । महाराजगंज रोड पर चौराहे से लेकर अस्पताल कालोनी तक दोनों ओर होटल चल रहे हैं जिसके कारण किसी भी दिन कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है क्या प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस प्रयास किया जाएगा । प्रबुद्ध वर्ग की मांग है कि इन अतिक्रमण कारियो का प्रतिदिन चालान  किया जाए ताकि कस्बे को अवैध अतिक्रमण से निजात मिल सके।

-- ---अमित अवस्थी की रिपोर्ट 

बालिका सुरक्षा अभियान : ‘चुप्पी तोड़े खुल कर बोले’

लखनऊ : उत्‍तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित बालिका सुरक्षा जागरूकता अभियान “कवच” के तहत राज्य भर में महिला एवं बाल कल्याण विभाग व अन्य सम्बंधित विभागों की मदद से बच्चियों को आत्म सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रही हैं। यह अभियान 1 से 31 जुलाई तक प्रदेश के विद्यालयों/महाविद्यालयों में चलाया जा रहा है। इसी क्रम में राजधानी के निगोहा कस्बे में स्थित श्री सत्यनारायण तिवारी विद्या मंदिर इंटरकालेज की 724 छात्राओं के साथ  सभागार में गोष्ठी आयोजित कर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी निरीक्षक जगदीश पांडेय ने कहा कि अभिभावक और अध्यापिकाएं बच्चियों के दोस्त बन कर रहें और उनको समाज में होनी वाली घटनाओं के विषय में जागरूक करते रहें। प्रभारी जगदीश पांडेय ने कहा कि ‘चुप्पी तोड़े खुल कर बोले’ बच्चियों को अब उनके साथ हो रही घिनौनी हरकतों के विषय में अपनी चुप्पी तोड़नी होगी। यदि उनके साथ कुछ भी अप्रिय घटित होता है, तो 24 घंटे विमेन पावर लाइन 1090 पर उसके संबंध में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती हैं।  यदि छात्राएं  समझती हैं कि वे रास्ते में हैं और अपने को असुरक्षित महसूस कर रही हैं तो तत्काल 100 नम्बर डायल कर अपनी स्थिति बताएं।100 डायल उनको सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाएगी। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि महिला हेल्पलाइन 181, वीमेन पावर हेल्पलाइन 1090, 1098 डायल 100, वन स्टाप सेन्टर, बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं, 112 एमेरजन्सी, कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 आदि योजना  बालिकाओं के लिए लाभप्रद है।
थाना प्रभारी ने छात्राओं से बात करते हुए कहा कि पढ़ाई करने वाली छात्राओं को सोशल मीडिया का कम उपयोग करना चाहिए अगर उपयोग करते भी हैं तो पढाई से संबंधित ही देखना चाहिए।  छात्राओं से  कहा कि  फेसबुक, वाट्सअप, यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया पर तरह तरह की वीडियोज होती हैं केवल पढ़ाई से सम्बंधित ही वीडियो देखना चाहिए। 
यूट्यूब पर मौजूद  कार्टून वीडियो के माध्यम से बचने के उपाय भी बताए गए ,
 कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य भुवनेश्वर शुक्ला  ने किया तथा इस अवसर पर अनिमेष पाण्डेय ,  सरिता विश्वकर्मा , प्रभाकर शर्मा , रजनीश शाही रामकुमार  सहित अनेक महिला कांस्टेबल व  शिक्षक शिक्षिकाएं व छात्र-छात्राएं मौजूद थी।

--- प्रमोद राही की रिपोर्ट 

टूट रही आशियाने की आस, पात्रों को नहीं मिल रहे आवास

शिवगढ़(रायबरेली) :  भारतीय जनता पार्टी का सबका साथ सबका विकास का नारा छलावा साबित हो रहा है। अपात्रों को आवास तो पात्रों को आवास के लिए ब्लॉक से लेकर जिले तक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। विदित हो कि शिवगढ़ क्षेत्र के बैंती गांव की रहने वाली बेसहारा आसमा पत्नी स्वर्गीय यार मोहम्मद जान हथेली पर लेकर अपने परिवार के साथ कच्चे जर्जर मकान में रह रही है। आलम यह है कि छत की अधिकांश धन्निया टूट गई है। बारिश होने पर स्वयं को बचाना तो दूर की बात गृहस्थी बचा पाना एक चुनौती से कम नहीं है। रात में जब सभी सोते हैं तो यह परिवार मारे दहशत के कच्ची कोठरी के कोने में बैठकर रतजगा करता है।वहीं बैंती गांव में ही पिछले कई सालों से पल्ली तान कर रह रही रूबी पत्नी रुस्तम का दर्द फूट पड़ा। रूबी ने बताया कि पिछले कई सालों से वह तानकर पति और बेटे के साथ रहती है। परिवार की माली हालत होने के चलते एक छोटा सा आशियाना बना पाना उसके लिए किसी सपने से कम नहीं है। जरा सी बारिश होने पर पूरे परिवार को भूखे सोना पड़ जाता है। रूबी ने बताया कि आवास के लिए ग्राम प्रधान से लेकर खण्ड विकास अधिकारी की चौखट के कई चक्कर काटे किंतु कोई सुनवाई नही हुई।

जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि इस सम्बन्ध में उपजिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की गई है। मामला संज्ञान में है जो भी पात्र है उन्हें योजना का लाभ अवश्य दिया जायेगा। 
 
---अंगद राही की रिपोर्ट 

दुष्कर्म के अभियुक्त को पुलिस ने किया गिरफ्तार


सलोन (रायबरेली) : महिला के साथ जबरन दुष्कर्म का है।  महिला शौच के लिए अपने घर के पीछे बाग में गई थी । तभी अचानक एक युवक ने आकर उस युवती को पकड़कर उसका मुंह दबा दिया और जबरदस्ती दुष्कर्म किया। महिला ने रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई  तो थाना सलोन की पुलिस ने आरोपी अभियुक्त को खोजना शुरू किया। तभी सूचना मिली कि दुष्कर्म का आरोपी माता मेडुली मंदिर के पास खड़ा है। उसी समय प्रभारी निरीक्षक रामआशीष उपाध्याय ने आरक्षी दीपेंद्र मिश्रा व रवि चौरसिया के साथ सूचना स्थल पर पहुँचे ।माता मेढ़ली मंदिर गेट के पास खड़े उस युवक को गिरफ्तार किया तथा पूछताछ करने पर बताया  कि आरोपी राहुल पासी पुत्र जगदीश प्रसाद निवासी बड़की बगिया मजरे सलोन देहात थाना क्षेत्र सलोन का रहने वाला है।पुलिस  ने युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। 

----  विवेक कुमार मौर्य की रिपोर्ट 

मुख्य मार्केट का ट्रांसफार्मर हुआ खराब,व्यापारी ग़र्मी से बेहाल

डलमऊ (रायबरेली) : गदागंज बाजार में लगा हुआ बिजली का ट्रांसफार्मर मंगलवार को अचानक ओवरलोड की वजह से फुक गया जिससे पूरे बाजार सहित बैंकों की विद्युत आपूर्ति बंद हो गई। विद्युत आपूर्ति ठप होने से व्यापारी, बैंक, कर्मचारी, ग्राहक सभी को परेशानी हो रही है।  24 घंटे बीतने के बाद भी बिजली बिभाग की नींद नहीं टूटी। 
बताते चलें कि गदागंज मुख्य बाजार में विद्युत आपूर्ति हेतु ट्रांसफार्मर लगा हुआ है जिससे संपूर्ण बाजार की विद्युत आपूर्ति की सप्लाई की जाती है। इसी सप्लाई से बैंकों के कामकाज के साथ साथ इंटरनेट सेवाएं व व्यापारी अपने कामकाज निपटाते हैं। मंगलवार को अचानक ओवरलोड की वजह से ट्रांसफार्मर फुंक गया जिससे बाजार में लगभग 300 से 400 दुकानों की विद्युत आपूर्ति बंद हो गई। बाजार में स्थित यूको बैंक,जिला सहकारी बैंक सहित सहज जन सेवा केंद्र व व्यापारियों के कामकाज ठप हो गए। व्यापारी रवि शुक्ला संदीप कुमार रोहित सहित सैकड़ों की संख्या में व्यापारियों ने बताया कि बिजली विभाग को सूचना दी गयी है अभी तक ट्रान्सफार्मर को बदलने के प्रयास नहीं किए गए हैं। 
 
--  रविंद्र कुमार पाल की रिपोर्ट 

किशोरी की मौत के बाद सामने आया उसका प्रेमी, लगाया ये आरोप

 
खीरों (रायबरेली) : थाना क्षेत्र के एक गांव में एक युवती की इलाज के दौरान लखनऊ के एक अस्पताल में बुधवार की सुबह मौत हो गयी। मौत के बाद परिजन उसका शव लेकर घर आये और युवती का अन्तिम संस्कार करने की तैयारी करने लगे। इसी दौरान मृतका युवती के प्रेमी ने थाने पहुंचकर परिवारीजनों पर ह्त्या का कथित आरोप लगाया। पुलिस ने घटना की प्रारम्भिक जांच की।  परिजनों ने बीमारी से मौत बताते हुए  पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। मामला दो समुदायों के बीच का होने के कारण पुलिस भी मामले में नजर बनाए हुए है .  


खीरों थाना क्षेत्र के एक गांव की युवती के परिजनों ने बताया कि बीते तीन माह से मेरी नाबालिग पुत्री बीमार थी।  इलाज चल रहा था।  बुधवार की सुबह उसकी लखनऊ के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी जिसका शव अस्पताल से घर लाया गया है।  पोस्टमार्टम नही कराना चाहते है।  शव का अन्तिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे है। प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि लडकी की मौत की जानकारी मिली है। मौके पर पहुंचकर घटना की जांच की गयी जहां परिजनों ने युवती की मौत बीमारी से होना बताया है। लिखित रूप से पोस्टमार्टम नही कराने से मना कर दिया है। 

--- दिवाकर तिवारी की रिपोर्ट 

इन उपायों को अपनाकर पानी बचाकर रखते आये हैं हमारे पूर्वज 

आज भारत में सबसे बड़ी सस्मस्या के रूप में पेयजल की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है मगर हम अब भी जल सरक्षण के नाम पर कोई भी उपाय नहीं कर पा रे हैं, नीति आयोग की ताज रिपोर्ट को मानें तो भारत के लगभग 21 बड़े राज्य जलसंकट से जूझ रहे हैं, यानी लगभग 100 मिलियन लोग पानी की तंगी से परेशान हैं इसके बावजूद लोग लगातार पानी बर्बाद करने में लगे हुए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है की पानी को बचाया नहीं जा सकता है, कुछ ऐसे प्राचीन उपाय भी हैं जिनके  कारण हमारे पूर्वज हमारे लिए इतना पानी बचाकर रखते थे, खासकर बरसात के मौसाम में सबसे अधिक पानी का बचाव किया जा सकता है 
आइये जानते हैं की किन उपायों से हमारे पूर्वज सबसे अधिक बरसात के पानी का सरक्षण करते थे।  

1 - झालरा- ये आयताकार होते हैं जिनमें भीतर उतरने के लिए तीन या चार तरफ सीढ़ियां होती थी, इसमें झील या पास के जलाशय से पानी भरा जाता है, इन्हें बनाने का मकसद धार्मिक संस्कारों, शाही समारोहों और कम्युनिटी की जरूरतें पूरा करना था, बाद में ये इतने लोकप्रिय हो गए कि पानी की आसान आपूर्ति का जरिया बन गए, राजस्थान में पानी का ये स्त्रोत लोकप्रिय था, आज भी जोधपुर शहर में 8 झालरा हैं, इनमें से एक 1600 ईसवीं पूर्व का माना जाता है।  

2 - बावड़ी- ये पानी का अनोखा सोता है जो कभी राजस्थान में पानी की आपूर्ति के लिए बड़े नेटवर्क का काम करते हैं. इसमें रेनवॉटर का इस्तेमाल किया जाता था,  बारिश के पानी को नहरों के जरिए इनकी तरफ मोड़ दिया जाता था. इससे बावड़ी के नीचे जलस्तर अच्छा होने लगेगा और कुछ ही बारिशों में ये पानी से लबालब हो जाएग,. गर्मी में पानी भाप बनकर न उड़े या कम नुकसान हो, इसके लिए बावड़ी काफी गहरी बनाई जाती रही। 

3 टांका- ये ट्रेडिशनल रेनवॉटर संचयन की तकनीक है जो राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में अपनाई जाती है. जैसे कि थार रेगिस्तान में. टांका बेलनाकार और पक्का भूमिगत गड्ढा होता है. इसमें बारिश के पानी को नालियों या गोलाकार बनावट (पाइप) के जरिए पानी भरा जाता है. एक बार पूरी तरह से भर जाने पर टांका पूरे साल रह सकता है. एक औसत आकार का टांका पांच सदस्यीय परिवार के लिए काफी होता है।  

4 - जोहड़ - भूमिगत पानी बचाने के लिए ये सबसे पुरानी तकनीकों में से एक है. ये मूलतः मिट्टी के छोटे-छोटे चेक डैम हैं जो बारिश के पानी को जमा करके ही बनाए जाते हैं. जोहड़ों की बनावट चांद के आकार की होती है. जिस हिस्से पर जल का दबाव ज्यादा हो सकता है, उसे दो या तीन गुना ज्यादा गहरा बनाते हैं. जोहड़ बनाते हुए ध्यान रखा जाता है कि पानी का वाष्पीकरण न हो या कम से कम हो. यानी इसकी गहराई ज्यादा होती है, जबकि लंबाई-चौड़ाई कम होती है. जिस जगह पर मुरूम यानी एक खास तरह की गिट्टी वाली जमीन होती है, जोहड़ वहीं बनाए जाते हैं ताकि पानी लंबे वक्त तक जमा रह सके.  

5 - पानम केनी - केरल में ये पारंपरिक तकनीक काफी प्रचलित है, खासकर आदिवासी इलाकों में इसका ज्यादा इस्तेमाल होता है. इसमें एक विशेष तरह के कुएं में पानी भरा रखने के लिए लकड़ी के सिलेंडरों का उपयोग होता है, ये लकड़ी के सिलेंडर चार फीट चौड़े और इतने ही लंबे होते हैं. बाद में इन सिलेंडरों को छोटे-छोटे कुओं में फिट कर दिया जाता है, देखा गया है कि इनमें पानी कभी खत्म नहीं होता है, यहां तक कि तेज गर्मी में भी इन इलाकों में इसी तकनीक से भरपूर पानी रहता है।  

6 - कुंड- यह तश्तरी के आकार की संरचना होती है जो धीरे-धीरे नीचे की ओर जाती है और बीच में काफी गहरी होती है. इसे तैयार करने का मकसद पीने का पानी जमा करना था. पश्चिमी राजस्थान और गुजरात के रेतीलों इलाकों में जल संचय की यह तकनीक काफी अपनाई गई. कुंड में भीतर और बाहर की ओर चूने और राख की मोटी परत लगाई जाती थी, जिससे पानी ठंडा और शुद्ध भी रहता था. माना जाता है कि 1607 ई. में राजा सूर सिंह ने सबसे पहले कुंडों के निर्माण की तकनीक बताई और मेलन गांव में सबसे पहले कुंड बनाया गया था।  

7 - तालाब- ये एक तरह के जलाशय हैं जहां घरेलू जरूरतों और पीने के पानी के लिए जलसंचय किया जाता है. ये प्राकृतिक भी हो सकते हैं और मानव निर्मित भी हो सकते हैं. बुंदेलखंड क्षेत्र के टीकमगढ़ में पोखरणी तालाब प्राकृतिक तालाब का उदाहरण है. आकार के आधार पर तालाब का नाम बदल जाता है. जैसे 5 बीघा से कम क्षेत्रफल वाले जलाशय को तलाई कहते हैं. मध्यम आकार की झील को बांधी कहते हैं।

ये है सुप्रीम कोर्ट की शानदार नवनिर्मित इमारत 

नईदिल्ली - सुप्रीम कोर्ट की नवनिर्मित भव्य इमारत बुधवार को मिल जाएगी, इस विशाल इमारत को आधिनिक तरिके से इको फ्रेंडली बनाया गया है, आज शाम भारत के राष्ट्रपति महमामहिम रामनाथ कोविंद इस नए भवन का उद्घाटन करेंगे, इस भव्य इमारत के निर्माण में लगभग 885 करोड़ की लागत आयी है इसको 12.19 एकड़ में बनाया गया है, इसमें कार्य करने के लिए लगभग 15 लाख चालीस हजार वर्ग फीट का वर्किंग एरिया बनाया गया है।  
सुप्रीम कोर्ट का यह नया भवन सुप्रीम कोर्ट के पास सड़क के दूसरी तरफ प्रगति मैदान के साथ अप्‍पू घर को हटाकर नई बिल्डिंग बनाई गई है, जबकि नई बिल्डिंग सुप्रीम कोर्ट की पुरानी बिल्डिंग से जुड़ी रहेगी, जिसका रास्ता भूमिगत बना हुआ है।  

ये हैं नए भवन की विशेषताएं 

28 जनवरी 1950 को शुरू किये गए भारतीय सुप्रीम कोर्ट का लुक काम पहले संससद भवन में होता था मगर 8 वर्षों बाद 1958 में सुप्रीम कोर्ट की अपनी बिल्डिंग में आ गया, सुप्रीम कोर्ट में कुल 31 जजों के पद हैं और इन सभी पदों पर नियुक्ति है, जो सभी अदालतें पुरानी बिल्डिंग में कार्यरत हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस नई बिल्डिंग में कई विशेषताएं हैं सुप्रीम कोर्ट का सारा प्रशासनिक काम, मुकदमों की फाइलिंग, कोर्ट के आदेशों और फैसलों की कापियां लेने आदि सभी काम पुरानी बिल्डिंग से इस नई बिल्डिंग में शिफ़्ट हो जाएगा, इस भवन में 2000 कारों के लिए तीन मंजिला पार्किंग होगी और वकीलों को अपने लिए 500 नए चैंबर मिलेगें, इस बिल्डिंग में 650 और 250 लोगों की क्षमता वाले दो ऑडिटोरियम और एक बड़ा राउंड टेबल कांफ्रेंस रूम बनाया गया है,  मुकदमों की सुनवाई करने वाली अदालतें पुरानी बिल्डिंग में ही रहेगी, साथ ही चीफ जस्टिस और अन्य जजों के आफिस भी पुरानी बिल्डिंग में बने रहेंगे।  

गुरु के चरण वंदन कर भक्तों ने लगाई गंगा में आस्था की डुबकी

डलमऊ ( रायबरेली ) : आषाढ़ माह गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हजारों की संख्या श्रद्धालुओं ने डलमऊ कस्बे के विभिन्न घाटों पर आस्था की डुबकी लगाकर मन्नतें मांगी। गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गंगा नदी में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं ने पूर्णिमा के 1 दिन पूर्व ही स्नान घाटों पर पहुंच गए थे। रात में घाटों पर   ढोल मजीरो की धुन में भक्ति गीत भी गए जिससे गंगा तक भक्ति रस में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने प्रातकाल करीब 3:00 बजे से ही स्नान करना प्रारंभ कर दिया था। सुबह 5:00 बजे से 8:00 बजे के बीच स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी 10:00 से लेकर 12:00 बजे के बीच स्नान घाट श्रद्धालुओं से भर गए लोग अन्य स्नान घाटों की तरफ जाने लगे। देखते ही देखते कस्बे के मुख्य मार्गों पर भारी भीड़ लगने लगी। दूरदराज से आने वाले लोगों को जाम की समस्या से बचाने के लिए प्रशासन द्वारा कस्बे के मियां टोला, भागीरथी मैरिज हॉल, वीआईपी गेस्ट हाउस बिजली पावर हाउस के पास अस्थाई वाहन स्टैंड की व्यवस्था की गई थी जिससे दूरदराज से आए श्रद्धालुओं को जाम की समस्या से निजात मिली। श्रद्धालुओं को सुरक्षित गंगा नदी में स्नान कराने के लिए प्रशासन की तरफ से बेरी कैटिंग के साथ साथ भारी पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी जिससे इस पूर्णिमा पर चोरी की घटनाएं नहीं घटित हो सकी। तीर्थ पुरोहितों की मानें तो इस पूर्णिमा पर लगभग 50 से 60 हजार श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में स्नान किया था।

जगह जगह हुई हवन पूजन कथा

गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर दूरदराज से लगभग हजारों की संख्या में श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान कर मन्नतें मांगी तथा स्नान घाटों के पास स्थित देवी-देवताओं के मंदिरों में पहुंचकर जम कर पूजा अर्चना की इसके बाद स्नान घाटों पर तीर्थ पुरोहितों से भगवान श्री सत्यनारायण की व्रत कथा भी सुनी इसके बाद श्रद्धालुओं ने अपनी अपनी तीर्थ पुरोहितों को दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

बड़े मठ में आयोजित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम 

गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर बड़े मठ में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहीं दूसरी तरफ दूरदराज से आए भक्तों को श्री श्री 1008 स्वामी देवेंरानन्द गिरी महाराज द्वारा दीक्षा दी गई। गुरु पूर्णिमा पर रायबरेली जनपद के साथ विभिन्न क्षेत्रों से 165 भक्तों को उक्त महंत द्वारा दीक्षा दी गई। इसके पश्चात गुरु के शिष्यों ने उनकी विधिवत पूजा अर्चना भी किया बड़े मठ में 1 दिन पूर्व ही विशाल भंडारे का आयोजन आयोजित किया गया था जिसमें क्षेत्रीय लोगों के साथ-साथ दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने भी विशाल भंडारे का प्रसाद चखा। गुरु पूर्णिमा के पर्व पर दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ किसी भी प्रकार की कोई अनहोनी ना हो और सकुशल मेला संपन्न हो सके। इसके लिए बड़े मठ पर  बाल पंडितों द्वारा विशाल मंत्रोच्चारण किया जा रहा था। पूर्णिमा की एक दिन पहले से बड़े मठ में मंत्र उच्चारण किया जा रहा था 11 बाल पंडितों द्वारा पूजा को संपन्न कराया गया जानकारी देते हुए स्वामी दिव्यानंद गिरी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष बाल पंडितों के माध्यम से विशाल मंत्रोच्चारण कराया जाता है जिससे मेले के दौरान किसी प्रकार की कोई घटना ना हो।


-- रविंद्र कुमार पाल की रिपोर्ट