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इस मामले में फिर सक्रिय हुई सीबीआई, एक साथ 18 शहरों में की ताबड़तोड़ छापेमारी  

नईदिल्ली -  सीबीआई ने बैंकिंग मामलों में हुई धांधली के मामलों में ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए एकसाथ 18 शहरों में छापेमारी की है, सीबीआई की इस कार्यवाही से धोखाधड़ी करने वालों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ सीबीआई एक साथ 50 जगहों पर छापेमारी कार्रवाई कर रही है।   सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी के मामले में विभिन्न कंपनियों, उनके प्रमोटरों, निदेशकों, फर्मों और बैंक अधिकारियों सहित कई आरोपियों के खिलाफ 14 मामले दर्ज किए गए हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक लगातार बैंक धोखाधड़ी की शिकायत पर मंगलवार को कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने पूरे देश में छापेमारी कार्रवाई की है. अधिकारियों ने बताया कि देश में 12 राज्य में विभिन्न मामलों में कंपनियों के प्रमोटर्स और निदेशकों के खिलाफ एक साझा कार्रवाई के तहत एजेंसी की टीमों ने 18 शहरों में 50 स्थानों पर छापे मारे. सीबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक देशभर में बैंक धोखाधड़ी घोटाले के मामले में सीबीआई ने विशेष अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत आज छापेमारी कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है वहीँ मामले में सीबीआई ने विभिन्न कंपनियों, उनके प्रमोटरों निदेशकों, फर्मों और बैंक अधिकारियों सहित आरोपियों के खिलाफ 14 मामले दर्ज हैं।  

रायबरेली एसपी को कोर्ट ने जारी की नोटिस, स्वाट टीम के सिपाही को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश

रायबरेली। एनडीपीएस एक्ट से जुड़े दो मामलों में गवाह न आने पर कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने एसएसपी फैजाबाद (अयोध्या) और एसपी रायबरेली को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश जैगमउद्दीन ने बुधवार को दिया। 
एनडीपीएस से जुड़े  पहले मामले में जिले के स्वाट टीम में तैनात सिपाही मनोज कुमार सिंह को गवाही के लिए कोर्ट में हाजिर होने के लिए 9 जुलाई को एनबीडब्ल्यू जारी किया गया था लेकिन वह नहीं आए। 
इस पर कोर्ट ने एसपी रायबरेली को तीन दिन में कारण स्पष्ट करने को कहा है कि एनबीडब्ल्यू का तामीला किन परिस्थितियों में नहीं कराया गया। कोर्ट ने सिपाही मनोज कुमार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश भी दिया है।

दूसरे मामले में एसआई विनोद कुमार यादव की गवाही होनी है, जो इस समय अयोध्या के मवई में तैनात हैं। एसआई को कई बार सम्मन भेजा गया, किंतु न तो वह आए और न ही इसका कोई उचित कारण ही बताया। 
इसे कोर्ट ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना मानते हुए एसएसपी फैजाबाद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है कि क्यों न उनके विरुद्ध न्यायालय की अवमानना का मामला उच्च न्यायालय को संदर्भित कर दिया जाए।

 

सई नदी में शव मिलने से मचा हड़कंप

अमित अवस्थी

रायबरेली। बछरावां थाना क्षेत्र की सुदौली ग्राम सभा में स्थित सुप्रसिद्ध भवरेश्वर मंदिर  के किनारे स्थित सई नदी में अज्ञात युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया ।प्राप्त जानकारी के अनुसार आज सुबह उस समय अफरा तफरी मच गई जब कुछ श्रद्धालुओं द्वारा नदी में किसी युवक का शव देखा गया । सूचना पर पहुंचे कोतवाल रवेन्द्र सिंह ने ग्रामीणो की सहायता से  बड़ी मशक्कत से शव को बाहर निकलवाया । शव से बहुत ही बदबू आ रही थी । जिससे ज्ञात होता है कि कई दिनों पूर्व युवक की नदी में डूब जाने से मौत हुई होगी । और इस समय बरसात के कारण नदी मे बहाव अधिक होने से शव बह कर चला आया और झाड़ियों में फस गया । युवक की उम्र लगभग 40 वर्ष अन्दाजी जा रही है । कोतवाल रवेन्द्रसिंह ने बताया कि शव  को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है । और उसकी शिनाख्त लोगों द्वारा कराई जा रही है।

रिटायर्ड कोस्ट गार्ड अफसर की मौत की जाँच में पुलिस को मिले अहम् सुराग , रोज मां से करती थीं बात

लखनऊ : पाक समुद्री सीमा में तट रक्षक अधिकारी रहीं स्नेहा सिंह कात्यात की मौत सिर पर गहरी चोट लगने और लंग्स फट जाने से हुई थी। इसकी पुष्टि सोमवार को हुए पोस्टमार्टम में हुई। मालूम हो कि देश की चार महिला कोस्ट गार्ड अफसरों में शामिल रहीं स्नेहा सिंह कात्यात (30) की रविवार को लखनऊ के पीजीआई के अंसल सिटी स्थित लेवाना सेलेब्रिटी गार्डन अपार्टमेंट में नौवीं मंजिल से गिरकर संदिग्ध हालात में मौत हो गई। पाकिस्तान समुद्री सीमा पर तैनात रहीं स्नेहा का शव अपार्टमेंट की खुली पार्किंग में पड़ा मिला। स्नेहा ने 6 जुलाई को डिप्टी कमांडेंट पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। सीसीटीवी फुटेज में स्नेहा सुबह करीब पौने 9 बजे आठवीं मंजिल की सीढ़ियों से नौवें तल पर जाते दिख रही हैं। पुलिस का मानना है कि स्नेहा ने खुदकुशी की है। हालांकि पति अरविंद ने इसे हादसा बताते हुए तहरीर दी है।
वहीं, पुलिस ने जब स्नेहा का फोन खंगाला तो सामने आया कि उसने आखिरी बार मां सुमन से बात की थी। पुलिस ने जब संपर्क किया तो सुमन ने बताया कि 19 मिनट की बातचीत के दौरान बेटी काफी निराश लग रही थी। प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सरोज के मुताबिक, तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। मालूम हो कि पीजीआई के अंसल सिटी स्थित लेवाना सेलेब्रिटी गार्डन अपार्टमेंट में रविवार को नौवीं मंजिल से गिरकर रिटायर्ड कोस्ट गार्ड अफसर स्नेहा सिंह कात्यात (30) की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी।
पुलिस के मुताबिक, स्नेहा सिंह कात्यात मूलरूप से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की रहने वाली थीं। उन्होंने कुछ सप्ताह पहले ही नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। यहां वह पति अरविंद, उनके बड़े भाई अजय सिंह और भाभी सुप्रिया के साथ अपार्टमेंट के दूसरे फ्लोर पर स्थित फ्लैट नंबर 201 में रहती थीं। प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सरोज के मुताबिक, सोमवार देर शाम डॉक्टरों ने स्नेहा कात्यात का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, सिर की सभी हड्डियां टूट गई थीं। दाहिने हाथ की कोहनी टूटी थी। काफी ऊंचाई से गिरने के कारण लंग्स व लीवर फट गया था। बाएं हाथ व पीठ पर चोट के निशान मिले हैं। सीने की सारी हड्डियां टूट गई थीं। डॉक्टरों ने बिसरा सुरक्षित कर लिया है। वहीं, स्वाब भी बनाया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गहरी चोट लगने के कारण मौत की बात सामने आई है।


रोज फोन पर मां से बात करती थीं स्नेहा


इंस्पेक्टर ने बताया कि स्नेहा का मोबाइल चेक किया गया। पता चला कि हादसे से पहले उसने आखिरी बार अपनी मां सुमन से बात की थी। यह कॉल 8.20 बजे से 8.39 बजे तक चली थी। इस पर पुलिस ने सुमन से फोन पर संपर्क किया। सुमन ने बताया कि स्नेहा हर रोज कॉल करती थी। रविवार सुबह बातचीत के दौरान वह काफी निराश लग रही थी। हालांकि तब वह ये नहीं भांप पाई थीं कि स्नेहा के साथ क्या होने वाला है। इंस्पेक्टर ने बताया कि स्नेहा के पिता गोविंद व मां सुमन देर रात लखनऊ पहुंचेंगे। तब उनसे विस्तार में बात की जाएगी।


प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, अरविंद व स्नेहा की पहले भी शादी हो चुकी थी। दोनों ने तलाक लिया था या नहीं इसके बारे में कुछ कह नहीं सकते हैं। करीब ढाई साल से दोनों के बीच प्रेमसंबंध थे। स्नेहा ने दो साल पहले ही 2017 जुलाई में नौकरी छोड़ने का नोटिस दिया था। 30 मई 2019 को दोनों ने शादी की। छह जुलाई को स्नेहा ने नौकरी से त्यागपत्र दिया था।
 

संदिग्ध परिस्थितियों में बहुमंजिला इमारत से गिरकर पायलट की पत्नी की मौत 

लखनऊ : राजधानी लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र स्थित सुशांत गोल्फ सिटी में लिनोवा ग्रुप के सेलिब्रिटी अपार्टमेंट में बहुमंजिला इमारत की नवी मंजिल से गिरकर युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा मृतक  महिला स्नेहा कात्यान सुबह जेठानी सुप्रिया सिंह के साथ चाय पी कर फ्लैट से बाहर निकली थी।  तभी अपार्टमेंट के इलेक्ट्रीशियन से महिला की मौत की सूचना मिली मृतक महिला स्नेहा कोस्ट गार्ड हल्दिया से सेवानिवृत्त थी जो अंसल गोल्फ सिटी के लिवाना ग्रुप के अपार्टमेंट के दूसरे फ्लोर पर 201 नंबर में जेठ अजय और जेठानी सुप्रिया सिंह के साथ रहती थी जो मूल रूप से पिथौरागढ़ निवासी हैं जिनकी शादी बीते 30 मई 2019 को प्रतापगढ़ के अंतू ग्राम निवासी अरविंद से लव मैरिज हुई थी। मृतका कोस्ट गार्ड हल्दिया से रिटायर्ड थी वहीं मृतका का पति अरविन्द स्पाइसजेट में पायलट है। जेठानी सुप्रिया के मुताबिक करीब 8:00 बजे स्नेहा ने चाय पी थी इसके बाद वह फ्लैट से बाहर निकल गई। अपार्टमेंट के इलेक्ट्रीशियन से स्नेह लता के गिरने की सूचना मिली। आनन-फानन में जब वह नीचे पहुंची तो उसकी मौत हो चुकी थी जिसकी सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंचे पुलिस के आला अधिकारियों ने तमाम बिंदुओं पर जांच पड़ताल की। हत्या या आत्महत्या के बिंदु को मानते हुए गहनता से क्राइम सीन का निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद सभी साक्ष्यो को कब्जे में लेकर मृतका के पति व परिजनों को सूचित करते हुए शव को पीएम के लिए भेज दिया वही पीएम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस आगे की कार्यवाही के बारे में रणनीति बनाएगी।
आपको बता दें एक माह पहले मृतका स्नेहा कात्यान की लव मैरिज स्पाइसजेट के पायलट से शादी हुई थी जो हाल ही में हल्दिया से सेवानिवृत्त होने के बाद लखनऊ आई थी और सुशांत गोल्फ सिटी के लिवाना ग्रुप के अपार्टमेंट में अपने जेठ व जेठानी के साथ रह रही थी वहीं पुलिस की मानें तो पति और मृतका के बीच थोड़ी अनबन भी चल रही थी शायद यही कारण हो सकता है कि मृतका ने आत्महत्या का रास्ता चुना लेकिन मृतका के फटे कपड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे थे। फिलहाल लखनऊ पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे लखनऊ एसएसपी कलानिधि नैथानी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है लेकिन महिला की मौत एक हादसा है या वह जानबूझकर अपार्टमेंट्स कूदी इसके बारे में अभी कुछ स्पष्ट नहीं हो सका फिलहाल अभी तक यह साफ नहीं हो पाया कि या मामला हत्या का है या खुदकुशी का पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी है।

--- प्रमोद राही की रिपोर्ट 

14 वर्ष पहले हुए पूर्वांचल के इस बहुचर्चित हत्याकांड में सभी आरोपियों को सीबीआई कोर्ट ने किया बरी

नईदिल्ली - पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की 2005 में गोलोयों से भूनकर हुई हत्या के मामले में आज सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाते हुए मामले में सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में संजीव माहेश्वरी, एजाजुल हक़, मुख्तार अंसारी, अफ़ज़ाल अंसारी, राकेश पांडेय, रामु मल्लाह, मंसूर अंसारी और मुन्ना बजरंगी को आरोपी बनाया गया था जिसमे से मुन्ना बजरंगी की इसी वर्ष जेल में जेल हत्या कर दी गयी थी।  
विदित हो कि पूर्व विधायक राय की 2005 में हत्‍या कर दी गई थी, वह मौजूदा विधायक थे,  इस घटना ने उस वक्‍त बड़ा राजनीतिक तूफान ला दिया था।  जिसका आरोप बाहुबली नेता मुख्‍तार अंसारी सहित अन्‍य लोगों पर लगा।  हालांकि कोर्ट ने मुख्‍तार सहित अन्‍य सभी को बरी कर दिया है, मुख्‍तार वर्तमान में बसपा से विधायक और उनके भाई अफ़जाल अंसारी बसपा से सांसद हैं। विधायक कृष्‍णानंद राय की हत्‍या के विरोध में और दोषियों को सजा देने की मांग करते हुए भाजपा के वरिष्‍ठ नेता और मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चंडौली में धरने पर बैठ गए थे, जिसके बाद इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया था. ऐसे में करीब 13 साल तक कोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद मुख्‍तार अंसारी को सबूतों की कमी के आधार पर बरी कर दिया गया है।  


कौन थे कृष्णानद राय 

पूर्वांचल की सियासत व दबंगई आज भी लोगों को अपराधों के वे किस्से याद दिलाती है जनकों सोंचकर ही रूह काँप जाती है। इसी दहशत को बरकरार रखने के लिए कई कई बार खूनी जंग हो चुकी है। ऐसी ही एक जंग का खूनी अंत हुआ था नवंबर 2005 में जब बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या ने यूपी की सियासत को हिलाकर रख दिया था।  
इस हत्याकांड के बाद अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह जैसे दिग्गज नेताओं ने सीबीआई जांच की मांग की थी। 
 इसके अलावा कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने जो एफआईआर दर्ज कराई थी, उसमें मुख्तार अंसारी, अफजल अंसारी, मुन्ना बजरंगी, अताउर रहमान, संजीव महेश्वरी, फिरदौस, राकेश पाण्डेय आदि का नाम शामिल थे। हालांकि मामले में बुधवार को दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने सबूतों के आभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया.

पुरानी है मुख़्तार व कृष्णानंद की रार की कहानी 

पूर्वांचल में अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह कहे जाने वाले मुख़्तार अंसारी 90 के दशक में सियासत की राह पकड़ी थी और  उन्होंने 1996 में विधानसभा चुनाव लड़ा और राजनीति पारी की शुरुआत की, सियासी ताकत के साथ आने से मुख़्तार का कद और बढ़ा, साथ ही दुश्मनों की संख्या भी. इनमे से एक प्रमुख नाम था ब्रजेश सिंह का. दोनों की दुश्मनी की भेंट कई लोग चढ़े. गैंगवार में काफी खून बहा, स्थानीय सूत्रों की माने तो ब्रजेश सिंह मुख़्तार के सामने कमजोर पड़ने लगा तो उसने सियासी मदद की तलाश शुरू की ऐसे में उसे यह मदद मिली कृष्णानंद राय से. कहते हैं सियासत में अपराध करने वाला और करवाने वाला अलग-अलग. जिस वक्त मुख़्तार की तूती बोल रही थी, उसी वक्त उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद सीट से 2002 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की टिकट पर कृष्णानंद राय ने चुनाव जीता. ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले कृष्णानंद राय से अंसारी की अदावत बढ़ने लगी और उनका कद बढ़ता देख अंसारी को ये बात हजम नहीं हुई. धीरे-धीरे दोनों में तकरार बढ़ने लगी और क्षेत्र में बालू गिट्टी के निकलने वाले ठेके जंग का कारण बनने लगे.
मुख़्तार और कृष्णानंद दोनों ही सियासत में थे और संवैधानिक पद पर आसीन थे. ऐसे में खुद अपराध करना उचित नहीं था. लिहाजा कृष्णानंद ने ब्रजेश सिंह को शरण दी तो मुख़्तार ने मुन्ना बजरंगी को खड़ा किया. पूर्वांचल में किसी बड़ी घटना का अंदेशा तो सभी को था, लेकिन वह कृष्णानंद राय की हत्या से जुड़ी होगी किसी ने नहीं सोचा था. नवंबर 2005 में पूर्वांचल के दो बाहुबलियों की जंग की भेंट चढ़े कृष्णानंद राय और उनके छह साथी. एक समारोह से लौटते हुए कई हथियार बंद लोगों ने कृष्णानंद राय के काफिले पर हमला किया. उनके पास एके-47 और कई ऑटोमैटिक हथियार थे, जिससे राय और उनके कुल छह साथियों की हत्या कर दी गई, 2002 में हुए जानलेवा हमले में बाल-बाल बचने के बाद ही मुख़्तार ने बदले की योजना बना ली थी. इस बार मुख़्तार सामने नहीं आना चाहते थे. ब्रजेश सिंह अंडरग्राउंड थे और उनके मारे जाने की अफवाह भी थी. लेकिन मुख्तार को भनक थी कि ब्रजेश को कृष्णानंद राय का संरक्षण प्राप्त है. लिहाजा मुख़्तार ने यह जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंपी थी इस हत्याकांड में सभी आरोपियाें के बरी होने के बाद सीबीआई की जांच पर सवाल उठ रहे हैं. इतने बड़े हत्याकांड में सीबीआई एक भी सबूत पेश नहीं कर सकी, सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया. फैसले के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस हत्या के पीछे कौन था?

भाजपा विधायक पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली किशोरी के चाचा को दस साल की सज़ा

कानपुर : उन्नाव से भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली किशोरी के चाचा को हत्या के प्रयास के मुकदमे में मंगलवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश ने 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।  जान से मारने की धमकी देने के मुकदमे में भी एक साल की सजा हुई है। दोनों सजाएं साथ चलेंगी।
वर्ष 2000 के जून में ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान किशोरी के चाचा ने अपने भाइयों के साथ मिलकर विधायक के छोटे भाई जयदीप सिंह उर्फ अतुल सिंह पर जानलेवा हमला किया था। जयदीप सिंह ने किशोरी के पिता व दोनों चाचा के खिलाफ माखी थाने में हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मुकदमे की सुनवाई के बाद 4 अक्तूबर 2004 को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने न्यायालय में उपस्थित किशोरी के पिता (अब मृतक) और छोटे चाचा (अब मृतक) को दोषमुक्त कर दिया था। जबकि तीसरा आरोपी (किशोरी का चाचा) फरार था। नवंबर 2018 को न्यायालय ने इसी मुकदमे में चाचा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।

माखी थाना पुलिस ने 14 साल से न्यायालय से फरार किशोरी के चाचा को दिल्ली से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे पुलिस चाचा को रायबरेली जेल से लेकर उन्नाव न्यायालय पहुंची। फास्ट  ट्रैक कोर्ट प्रथम में पेश किया। न्यायाधीश प्रहलाद टंडन ने दोनों पक्षों की बहस में अभियोजन की ओर से एडीजीसी रामजीवन यादव, अवधेश सिंह, राजेश त्रिपाठी व हरीश अवस्थी वहीं बचाव पक्ष से अजेंद्र अवस्थी, अशोक द्विवेदी व महेंद्र सिंह की बहस सुनी।

न्यायाधीश ने किशोरी के चाचा पर हत्या के प्रयास का दोष साबित होने पर 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अर्थदंड न जमा करने पर छह महीने अतिरिक्त सजा काटनी होगी। वहीं विधायक के भाई को जान से मारने की धमकी देने के मुकदमे में भी एक साल की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ चलेंगी। न्यायाधीश ने मुकदमे के निर्णय की एक कॉपी दोषी को देने के आदेश दिए हैं। बचाव पक्ष के वकील अजेंद्र अवस्थी व महेंद्र सिंह ने बताया कि 8 जुलाई को अभिलेखों से छेड़छाड़ मामले में सीजेएम कोर्ट में पेशी होगी।

लखनऊ में घड़ी व्यवसाई की गोली मारकर ह्त्या , दो लाख लूटे

लखनऊ :  राजधानी लखनऊ के आलमबाग इलाके में घड़ी व्यापारी की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद दो लाख रुपये से भरा ट्रॉलीबैग लूट लिया। हमले में दिल्ली से तगादा करने आया साथी व्यापारी घायल हो गया। दोनों व्यापारी स्कूटी पर सवार थे। दुर्गापुरी मेट्रो स्टेशन के पास रविवार रात करीब 10 बजे हुई इस वारदात से सनसनी फैल गई। 
मौके पर पहुंचे एसएसपी कलानिधि नैथानी ने इलाके की नाकाबंदी कराई, लेकिन बदमाशों का पता नहीं चला। प्रभारी निरीक्षक आनंद कुमार शाही ने बताया कि नाका के दुर्विजयगंज निवासी घड़ी एवं सिगरेट-पानमसाला व्यापारी मनोज भट्टाचार्य (50) दिल्ली से आए अपने दोस्त आशुतोष बजाज उर्फ आशू को साथ लेकर चारबाग में गुरुनानक मार्केट से तगादा वसूलने के बाद स्कूटी से चारबाग रेलवे स्टेशन जा रहे थे। 

इसी दौरान बदमाशों ने इस वारदात को अंजाम दिया। घायल आशुतोष ने पुलिस को बताया कि दुर्गापुरी मेट्रो स्टेशन के पास बाइक से आए दो बदमाशों ने उनकी स्कूटी को ओवरटेक करके रोका। पिछली सीट से उतरे बदमाश ने उनके सिर पर तमंचे के बट से हमला कर स्कूटी समेत गिरा दिया। मनोज को गोली मारकर दो लाख रुपये व अन्य सामान से भरा ट्रॉली बैग लूट ले गए।

इस बीच, राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने लहूलुहान मनोज को ट्रॉमा सेंटर और आशुतोष को अजंता अस्पताल पहुंचाया। ट्रॉमा में डॉक्टरों ने मनोज को मृत घोषित कर दिया। 

पुलिस की तहकीकात में सामने आया कि वारदात में 4 बदमाश शामिल थे। दो बदमाशों ने व्यापारियों पर हमला किया। बाकी दो बदमाश कुछ दूरी पर बाइक पर थे और इलाके की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। बदमाशों के सुराग के लिए पुलिस सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही है।


 

नगर निगम कर्मचारियों को पीटने वाला यह विधायक गया सलाखों के पीछे

 

सत्ता के नशे में चूर विधायक को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, बतातें चलें की इंदौर में विधायक आकाश विजयवर्गीय का नगर निगम के कर्मचारियों को पीटने का वीडियो सोशल मिडिया पर वायरल हो रहा था जिसके बाद हरकत मे आयी पुलिस ने मामले में विधायक पर मामला दर्ज का लिया था. आकाश के खिलाफ शहर के एमजी रोड थाने में सरकारी काम में बाधा और बलवा करने के मामले में  धारा 353, 294, 506, 147 और 148 धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। नगर निगम के जोनल अधिकारी धीरेंद्र बायस ने जानकारी दी है कि विधायक आकाश विजयवर्गीय सहित उनके कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज किया गया है.

क्रिकेट बैट से की थी पिटाई 


बताते चले की सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि आकाश किस तरह से अधिकारीयों की पिटाई कर रहे हैं. इंदौर के गंजी कंपाउंड इलाके में जर्जर मकान तोड़ने गए नगर निगम की टीम पर बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय ने क्रिकेट बैट से हमला बोल दिया था. उन्होंने सरेआम अफसर और कर्मचारियों को बैट से पीटा. इस दौरान पुलिस और नगर निगम अमले में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ हाथापाई और तीखी बहस भी की थी. उनके समर्थकों ने नगर निगम की जेसीबी मशीन में भी जमकर तोड़फोड़ की थी.
पूरे मामले को लेकर मध्‍य प्रदेश के सरकार में मंत्री बाला बच्चन ने कहा था कि  मामले में आकाश विजयवर्गीय के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस घटना से बीजेपी का चाल-चरित्र और चेहरा उजागर हुआ है. नगरीय प्रशासन राज्‍य मंत्री जयवर्धन सिंह ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को ऐसा नहीं करना चाहिए

चोरी के शक में युवक की पिटाई के बाद मौत, लगवाए गए थे जय श्री राम के नारे

झारखंड : झारखण्ड के  सरायकेला खारसवानंद  में एक 22 साल के युवक की रविवार को स्थानीय लोगों ने बुरी तरह पिटाई कर दी। उसे बाद में चोरी के शक में पुलिस के हवाले कर दिया गया। पीड़ित की पहचान तबरेज के तौर पर हुई है। उसे रविवार सुबह पहले सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में उसे जमशेदपुर के टाटा अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना को लेकर तबरेज के परिवार का कहना है कि यह सांप्रदायिक हमला था और उससे जबरन जय श्रीराम और जय हनुमान के नारे लगाने के लिए कहा गया। तबरेज के रिश्तेदार मकसूद आलम ने कहा, 'कुछ स्थानीय लोगों ने तबरेज की पिटाई की और फिर उसे पुलिस के हवाले कर दिया। उसपर चोरी का शक जताया गया जबकि यह सांप्रदायिक हमला था। उसे इसलिए मारा गया क्योंकि वह मुस्लिम था। उन्होंने उससे बार-बार जय श्रीराम और जय हनुमान के नारे लगवाए।'
उन्होंने आगे कहा,  'हमें अस्पताल में उससे मिलने तक नहीं दिया गया। हमारे पास घटना का वीडियो है। मैं चाहता हूं कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।' दूसरे रिश्तेदार ने कहा, 'हम चाहते हैं कि उस समय ड्यूटी पर मौजूद पुलिस के खिलाफ कार्रवाई हो।' मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि एफआईआर दर्ज हो चुकी है और आगे की जांच की जा रही है।