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नहीं हो रहा है अल्ट्रासाउंड,मायूस लौट रही है हजारों महिलाएं

 
रायबरेली : जिला महिला अस्पताल में रेडियो
लॉजिस्ट का लखनऊ ट्रांसफर हो जाने के कारण सैकड़ों महिलाओं को मायूस लौटना पड़ रहा है। सैकड़ो महिलाएं प्राइवेट सेंटर से अल्ट्रासाउंड कराने को मज़बूर हो रही है।तीन दिन पहले यहाँ तैनात वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट राजीव कुमार दीक्षित का ट्रांसफर लखनऊ कर दिया गया है। जिसकी वजह से पिछले तीन दिनों से जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड ठप्प है। शुक्रवार को जिला पुरुष अस्पताल के वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट सैयद अल्ताफ हुसैन के कोर्ट एविडेंस में चले जाने से स्थिति और भी बदतर हो गई। 
सीएमओ डॉक्टर डी के सिंह ने गैर जिम्मेदाराना
 बयान देते हुए कहा  कि कोई अल्टरनेट व्यवस्था नहीं की गयी है। जिस दिन डॉक्टर अल्ताफ कोर्ट एविडेंस में चले जायेंगे उस दिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो पायेगा।   
जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कुमार दीक्षित की तैनाती की गई थी। कई सालों से वो बखूबी अपना दायित्व निभा रहे थे। तीन दिन पहले उनका तबादला होने के बाद महिला अस्पताल में यह जांच पूरी तरह से बंद हो गई है। तीन दिन से भी गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड नहीं किया गया। ऐसे में महिलाओं को जांच के लिए भटकना पड़ रहा है।
जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव ने कुछ दिन पहले सोनोलॉजिस्ट डॉ. गणनायक पांडेय को रिलीव कर दिया था। अल्ट्रासाउंड जांच ठप होने के बाद सीएमओ ने लालगंज सीएचसी में तैनात सोनोलॉजिस्ट डॉ. जयंत सिंह को जिला अस्पताल संबद्ध कर दिया था। सीएमओ ने अब डॉक्टर की संबद्धता को खत्म करके लालगंज सीएचसी में अल्ट्रासाउंड जांच करने के आदेश दिए हैं।  
संबद्धता खत्म होने के बाद पुरुष अस्पताल में इलाज कराने के लिए आ रहे रोगियों को भी अल्ट्रासाउंड की जांच के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिला पुरुष अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अल्ताफ हुसैन को सीटी स्कैन जांच की रिपोर्ट बनानी पड़ती है। इसके अलावा एक्सरे के बाद बाद रोजाना 25 से 30 मेडिकोलीगल की रिपोर्ट भी बनानी पड़ती है। 
ऐसे में यहां मरीज़ों के लिए संकट पैदा हो गया है। 
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर डी के सिंह ने बताया कि कोई अल्टरनेट व्यवस्था नहीं की गई। डॉक्टर अल्ताफ हुसैन की तैनाती है वही अल्ट्रासाउंड करेंगे। जिस दिन वो कोर्ट जायेंगे उस दिन अल्ट्रासाउंड नहीं होगा। 

1 जुलाई को क्यों मनाया जाता है डॉक्टर्स डे

हेल्थ डेस्क : चिकित्‍सकों (Doctor) को हमारे देश में भगवान का दर्जा दिया जाता है। ऐसा इसलिय हैं क्‍योंकि डॉक्‍टर लोगों की जान बचाते हैं, उनकी रक्षा करते हैं। हालांकि अगर हम आज के बारे में बात करते हैं, तो कई डॉक्टर हैं जिनमें नैतिकता की कमी है। मगर देश में तमाम ऐसे डॉक्‍टर भी हैं जो अपने मूल्‍यों और कर्तव्‍यों को समझते हैं। हम इन्‍हीं चिकित्‍सकों के लिए हर साल राष्‍ट्रीय चिकित्‍सक दिवस (National Doctor's Day) मनाते हैं, जिससे चिकित्‍सकों के प्रति आभार प्रकट किया जा सके।
भारत में 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे के रूप में मानाया जाता है। आज का दिन इसलिए खास है क्‍योंकि यह दिन हर व्‍यक्ति को मौका देता है कि, आप डॉक्‍टरों की भूमिका, उनके होने का महत्‍व और उनकी जिम्‍मेदारियों के बारे में समझें। यह दिन इसलिए खास है क्‍योंकि, जो डॉक्‍टर हमारी निस्‍वार्थ भाव से सेवा करते हैं उनके प्रति सम्‍मान प्रकट करना है। 

सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, यह दिन चिकित्सा उद्योग और उसकी उन्नति के लिए भी मनाया जाता है। प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के डॉक्टरों के प्रयास भारत में अथक रहे हैं और यह दिन उन उपलब्धियों को दर्शाता है।

1 जुलाई ही क्यों?
तथ्य की बात करें तो, दुनिया भर के विभिन्न देशों में अलग-अलग तिथियों पर डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। भारत में, यह 1 जुलाई को मनाया जाता है क्योंकि यह भारत के सबसे प्रसिद्ध चिकित्सकों में से एक, डॉक्‍टर बिधान चंद्र रॉय (डॉ बीसी रॉय) का जन्म और पुण्यतिथि है। इस महान चिकित्सक के सम्मान के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 1991 में डॉक्‍टर्स डे मनाने की शुरूआत हुई थी। 

अन्य देशों में,  अलग-अलग दिनों में मनाया जाता है, जैसे कि ब्राजील में, यह 18 अक्टूबर को मनाया जाता है, जबकि अमेरिका में, यह 30 मार्च को मनाया जाता है।
डॉक्टर दिवस का प्रतीक रेड कार्नेशन (Red Carnation) है, (रेड कार्नेशन एक फूल है) क्योंकि ये फूल प्यार, दान, निस्वार्थता और बलिदान के लिए जाना जाता है, जो कि बताता है कि डॉक्‍टर को इन चीजों का पालन करना चाहिए। 
अमेरिकी राज्य जॉर्जिया में 30 मार्च को वर्ष 1933 में पहली बार डॉक्टर दिवस मनाया गया था। इसमें चिकित्सकों को कार्ड भेजना और मृत डॉक्टरों की कब्रों पर फूल चढ़ाना शामिल था।

--- ओनली माय हेल्थ से साभार 

अब कुत्ते लगाएंगे फेफड़े के कैंसर का पता

हेल्थ प्लस : योग दिवस पर भारतीय सेना ने कुत्त्तों के साथ एक फोटो शेयर की थी। इस फोटो पर राहुल गांधी ने ट्वीट किया तो एक नई बहस छिड़ गई।कुत्ते अचानक चर्चा में आ गए।  कुत्ते वफादार होने के साथ साथ कई अन्य तरीकों से फायदेमंद है।  

कुत्तों के सूंघने की शक्ति बहुत ज्यादा होती है, ये बात सभी जानते हैं। मगर हाल में हुई एक रिसर्च ये बताती है कि कुत्ते सूंघकर कुछ विशेष प्रकार के कैंसरों का पता 'एडवांस टेक्नोलॉजी' से भी ज्यादा सटीक तरीके से लगा सकते हैं। रिसर्च के अनुसार कुत्ते सूंघकर लंग्स कैंसर (फेफड़ों के कैंसर) का पता लगा सकते हैं। दुनियाभर में फेफड़ों के कैंसर के मरीजों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई है।

धूम्रपान वाले प्रोडक्ट्स जैसे- सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, ई-सिगरेट्स आदि फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। भारत में भी हर साल लाखों लोग फेफड़ों के कैंसर के कारण अपनी जान गंवाते हैं। 

फेफड़ों के कैंसर का पता अगर शुरुआती स्टेज में लगा लिया जाए, तो इसका इलाज आसानी से हो सकता है। फिलहाल लंग्स कैंसर का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन (CT Scan) और पीईटी स्कैन (PET Scan) जैसी तकनीकों का सहारा लिया जाता है। ये तकनीक बहुत अधिक खर्चीली हैं और कई बार इनसे प्राप्त होने वाले रिजल्ट भी सटीक नहीं होते हैं। लेकिन हाल में हुई एक रिसर्च बताती है कि कुत्ते अपनी सूंघने की शक्ति का इस्तेमाल करके लंग्स कैंसर का पता ज्यादा आसानी और जल्दी से लगा सकते हैं।